सोमवार, 21 फ़रवरी 2011

रोये अब किस द्वार पे जाकर लुटी-पिटी बेचारी हिंदी

रोये अब किस द्वार पे जाकर,
लुटी-पिटी बेचारी हिंदी;
घर के लोगों से निष्कासित,
अपमानित किस्मत की मारी हिंदी.


खूनी पंजे का खूनी खेल,
हिंदी हुई लहूलुहान;
जबरन किया सूर्य को अस्त,
वादा था जिनका नया विहान;
क्यूं कर किस पर दांव लगाए
हर बाजी में हारी हिंदी;
रोये अब किस द्वार पे जाकर,
लुटी-पिटी बेचारी हिंदी;
घर के लोगों से निष्कासित,
अपमानित किस्मत की मारी हिंदी.

हुई सिविल सेवा परीक्षा
अब अंग्रेजी के हवाले मित्रों;
बनेंगे भविष्य में कलक्टर
सिर्फ टाई-कोट-पैंट वाले मित्रों;
उपेक्षित थी बना दी गयी फिर वंचित
तेरी-मेरी-हमारी हिंदी;
रोये अब किस द्वार पे जाकर,
लुटी-पिटी बेचारी हिंदी;
घर के लोगों से निष्कासित,
अपमानित किस्मत की मारी हिंदी.

जिससे आशंकित बिल गेट्स हैं
भयभीत बिल क्लिंटन थे;
उसके खिलाफ साजिश रचने में
मशगूल सोनिया-मनमोहन थे;
गाँधी के चेलों की मारी
गाँधी की राजदुलारी हिंदी;
रोये अब किस द्वार पे जाकर,
लुटी-पिटी बेचारी हिंदी;
घर के लोगों से निष्कासित,
अपमानित किस्मत की मारी हिंदी.

1 टिप्पणी:

arganikbhagyoday ने कहा…

rochak aur bicharaniy !