बुधवार, 23 मार्च 2011

बोल मेरी दिल्ली बोल

delhiबोल मेरी दिल्ली बोल,
मोल तोल के बोल;
गांवों में है घुप्प अँधेरा,
तेरे घर में अखंड रोशनी;
बोल मेरी दिल्ली बोल;
गांवों में है सूखा पड़ रहा,
तेरी सड़कों पर पानी बह रहा;
बोल मेरी दिल्ली बोल;
सज-धज के तू बनी है रानी
कहाँ से आया बिजली-पानी;
बोल मेरी दिल्ली बोल;
मोल तोल के बोल.

कदम-कदम पे उडती सड़कें,
चिकनी-चुपड़ी खिलती सड़कें;
बोल मेरी दिल्ली बोल;
अपने भाग्य पर इठलाती सड़कें,
मंत्रालयों को जाती सड़कें;
बोल मेरी दिल्ली बोल;
कहाँ से आया इतना पैसा,
बेशर्म नहीं कोई तेरे जैसा;
बोल मेरी दिल्ली बोल;
मोल तोल के बोल.

तू दूसरों का हक़ खानेवाली,
फिर क्यों न रोज मने दिवाली;
बोल मेरी दिल्ली बोल;
तेरे घर में रोज घोटाला;
तेरा मुखिया (मनमोहन सिंह) बेईमानों की खाला,
बोल मेरी दिल्ली बोल;
कब आयेंगे तेरे होश ठिकाने,
पूरा देश जब लगेगा गाने;
लालगढ़ के लाल तराने;
बोल मेरी दिल्ली बोल;
मोल तोल के बोल.

1 टिप्पणी:

योगेन्द्र पाल ने कहा…

अच्छा लिखा, वैसे नाम नहीं लिखते तो भी समझ में आता कि आपका इशारा किस ओर है

थोडा फॉण्ट साइज बढ़ा लें तो पढ़ने में आसानी रहेगी

अब कोई ब्लोगर नहीं लगायेगा गलत टैग !!!