मंगलवार, 28 जून 2011

मुंगेरीलाल के बदनसीब सपने

mungeri

मित्रों,आजकल अपने मुंगेरी भाई बहुत परेशान हैं.काजीजी तो सिर्फ शहर की चिंता में ही दुबले हो गए थे,मुंगेरी भाई के पास तो चिंताओं का अम्बार है.एक चिंता अभी खत्म भी नहीं हुई होती है कि दूसरी बेचारे के छिलपट मगज पर आकर सवार हो जाती है.चिंता से चतुराई का घटना सर्वज्ञात तथ्य है सो बेचारे चतुर से चतुरी चमार बनते जा रहे हैं.क्या करें और क्या न करें;क्या खरीदें और क्या न खरीदें;आज सिर्फ आम आदमी की ही समस्या नहीं है बल्कि इससे सपनों की दुनिया के बेताज बादशाह भी त्रस्त हैं.
       मित्रों,इन दिनों मुंगेरीलाल जी की सबसे बड़ी समस्या है महंगाई.अभी बेचारे खुश चल रहे थे कि सब्जियों के दाम गिर गए हैं.कई महीनों के बाद उनकी बेलगाम जीभ ने हरी-हरी सब्जियों का स्वाद चखा था.मुंगेरी लाल जी की तरंगित आँखें फिर से लखना डाकू को पकड़ने के सपने देखने लगी थीं कि नींद ही टूट गयी.इस बार उनके रिटायर्ड दारोगा ससुर ने स्वप्नभंग नहीं किया बल्कि उनका सपना टूटा रेडियो पर डीजल,किरासन और रसोई गैस के दाम बढ़ने की खबर को सुनकर.सुनते ही मानो बेचारे की जिंदगी का ही जायका बिगड़ गया.
          मित्रों,मुंगेरी भाई ने एक लम्बे समय से दाल का स्वाद नहीं चखा.और भी ऐसी कई खाने-पीने की चीजें हैं जो इस कृशकाय प्राणी की पहुँच से दूर हो चुकी हैं.मुंगेरी भाई अब चिंतित हैं कि पहले से ही मनमाना भाड़ा वसूलने वाले निजी वाहन मालिक अब न जाने कितना किराया बढ़ा दें.कहीं ऐसा न हो कि अब डीजल गाड़ियों की यात्रा भी दाल-सब्जियों की तरह मुगेरी भाई की पहुँच से दूर हो जाए.फिर बेचारे कहाँ तक बिना जूता-चप्पल वाले पैरों को घसीटते चलेंगे?बात इतनी ही हो तो खुदा खैर करे.डीजल का दाम बढ़ने का मतलब है मालवाहक के किराये में भी मनमानी बढ़ोतरी.फिर बेचारे किस-किस वस्तु के उपयोग का त्याग करते चलेंगे.अगर इसी तरह ज़िन्दगी के लिए जरुरी वस्तुओं का एक-एक कर त्याग करते रहे तो बहुत जल्दी जिंदगी ही उनका त्याग कर देगी.
             मित्रों,मुंगेरी भाई ने कई साल पहले बिजली का कनेक्शन लगवाने के लिए बिहार राज्य विद्युत् बोर्ड में आवेदन किया था.मीटर भी जमा करवाया था लेकिन कई साल बीत जाने के बाद भी बेचारे को विद्युत् बोर्ड के महा (ना) लायक कर्मचारियों के शुभ दर्शन नहीं प्राप्त हुए हैं.सो बेचारे रात में ढिबरी जलाते हैं और इस तरह तनहाई में रात को धोखा देने का प्रयास करते हैं.लेकिन अब क्या होगा रामा रे?अब राशन के साथ-साथ किरासन भी बेचारे की पहुँच से बाहर होती जा रही है.ढंग से उनका नाम तो बीपीएल सूची में होना चाहिए था लेकिन गाँव के मुआं निमुंछिये मास्टरों की भ्रष्ट करतूतों के कारण बेचारे एपीएल में पड़े हुए हैं.ऐसा भी नहीं है कि उन्होंने इसे सुधरवाने के लिए कोई प्रयास नहीं किया लेकिन कई वर्षों तक प्रखंड कार्यालय के चक्कर काटने के बाद भी जब काम नहीं बना तो छोड़ दिया खुद को खुदा के भरोसे.
             मित्रों,मुंगेरी भाई को रसोई गैस का मूल्य बढ़ने से कोई फर्क नहीं पड़ता है क्योंकि श्रीमान के पास कभी इतना पैसा नहीं रहा कि जगे हुए या सोए हुए में गैस कनेक्शन लेने की सोंचते भी.वैसे वे इसका दाम बढ़ने से जनता को होनेवाली दुश्वारियों से पूरी तरह अनजान हों ऐसा भी नहीं है.अपने दिल से जानिए औरों के दिल का हाल कहावत के अनुसार वे चिंतित हैं कि गैस कनेक्शन रखने वालों का क्या होगा.इस महंगाई में वैसे ही जीवन-रक्षा कठिन है;अब और भी मुश्किल हो जाएगी.
          मित्रों,मुंगेरी भाई हर चुनाव में नियमित तौर पर मतदान करते आ रहे हैं;इस उम्मीद में कि इस बार तो बदलाव आकर रहेगा.नेताजी ने अपने मुंह से जो कहा है.आज उन्होंने जब अख़बारों में पढ़ा कि शरद पवार नाम के एक सम्मानित व वरिष्ठ मंत्री ने खुद ही चीनी का दाम बढ़वा दिया तो उन्हें खुद के आदतन मतदान करने पर शर्म आने लगी और गुस्सा भी.आजादी के समय से ही बेचारे सपने देखते रहे हैं.आपने उन्हें दूरदर्शन पर सपने देखते हुए देखा भी है.लेकिन लखना डाकू को पकड़ने का उनका सपना तो उनकी सपनीली दुनिया का काफी छोटा भाग है.उन्होंने कई बार देश के बदलने के सपने अहले सुबह में देखे.इस उम्मीद में कि लोग कहते हैं कि सुबह का सपना सच हो जाता है परन्तु सब व्यर्थ.इसलिए मुंगेरी भाई नहीं चाहते अब कोई भी सपना देखना किन्तु यह तो ऐसी शह है जिस पर उनका कोई नियंत्रण नहीं.स्वर्गीय पत्नी के प्यार में उन्होंने क्या-क्या नहीं छोड़ा?अब बेचारे अफीम और शराब को हाथ तक नहीं लगाते लेकिन पत्नी के लाख मना करने पर भी सपना देखना नहीं छोड़ पाए.अभी भी एक सपना देखने में लगे हैं.वे देख रहे हैं कि देश में राम-राज्य आ गया है.किसी को भी किसी प्रकार का दुःख नहीं है.सबके सब तन-मन से पवित्र हो गए हैं और उनका यानि मुंगेरी भाई का नाम बीपीएल में जुड़ गया है.मंत्रियों-अफसरों-भ्रष्ट कर्मचारियों ने अपनी सारी संपत्ति जनता में वितरित कर दी है और खुद दांतों के बीच में तिनका दबाकर वन को प्रस्थान कर गए हैं.चारों तरफ धर्म की ध्वजा फहराने लगी है.

1 टिप्पणी:

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ (Zakir Ali 'Rajnish') ने कहा…

ब्रज जी,

आरजू चाँद सी निखर, जिन्‍दगी रौशनी से भर जाए,
बारिशें हो वहाँ वे खुशियों की, जिस तरफ आपकी नजर जाए।
जन्‍मदिन की हार्दिक शुभकामनाएँ।
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ओझा उवाच: यानी जिंदगी की बात...।
नाइट शिफ्ट की कीमत..