मंगलवार, 5 मार्च 2013

नीतीश कुमार विकास पुरूष या विनाश पुरूष

मित्रों,इन दिनों नीतीश बनाम मोदी की चर्चा खूब जोरों पर है। कुछ लोग दोनों के कथित विकास-मॉडल की तुलना करने में लगे हुए हैं। ऐसा करनेवाले वे लोग हैं जो जानते ही नहीं हैं कि नीतीश कुमार ने बिहार को क्या दिया है और बिहार के किन-किन क्षेत्रों को विनष्ट कर दिया है,बिहार से क्या-क्या छीन लिया है। बिहार की हकीकत को सिर्फ वही समझ सकता है जो बिहार में रह कर इसका प्रत्यक्ष अनुभव करता हो वरना मीडिया के माध्यम से बिहार की वास्तविकता को जानना और समझना असंभव है क्योंकि नीतीश कुमार ने मीडिया को ही खरीद लिया है।
           मित्रों,पहली बात कि नीतीश जब बिहार के मुख्यमंत्री बने थे तब बिहार पूरी तरह से बर्बाद हो चुका था और उसकी विकास-दर लगभग शून्य थी। इसलिए जो भी सड़कों और छोटे पुलों के बनने से विकास हुआ विकास-दर काफी तेज दर्ज हुई। जब भी कोई रूकी हुई गाड़ी चलेगी तो भले ही उसकी गति अन्य पहले से ही तेज गति से चल रही गाड़ियों की तुलना में काफी कम हो उसका त्वरण तो ज्यादा रहेगा ही। हम सभी जानते हैं कि 0 किमी/घंटे की रफ्तार से चल रही गाड़ी की गति को 20 या 40 किमी/घंटे पर ले जाना आसान है लेकिन 200 किमी/घंटे की रफ्तार को 205 करना भी बहुत मुश्किल होता है। बिहार जहाँ 0 से 20-40 पर पहुँचा है वही गुजरात 200 से 205 पर फिर भी लोग पागलों की तरह बिहार के विकास-मॉडल को गुजरात के विकास-मॉडल से ज्यादा महान साबित करने में लगे हुए हैं। जबकि नीतीश कुमार खुद भी अपने मुँह से सैंकड़ों बार यह कह चुके हैं कि इसी विकास-दर से अगर बिहार लगातार 25 सालों तक विकास करता रहा तब जाकर वह प्रति व्यक्ति आय के मामले में राष्ट्रीय औसत पर पहुँचेगा।
                  मित्रों,बिहार में जो लोग रहते हैं वे जानते हैं कि नीतीश ने वास्तव में बर्बाद बिहार को और भी बर्बाद करके रख दिया है। बिहार में ऐसा कोई भी महकमा नहीं जो ठीक काम कर रहा हो। बिहार में दर्ज होनेवाले एफआईआर इस बात के गवाह हैं कि बिहार में कानून-व्यवस्था की स्थिति एक बार फिर से बिगड़ गई है। फिर से बिहार का अपहरण-उद्योग चालू हो गया है अंतर इतना ही है कि बिका हुआ मीडिया अब इस तरह के मामलों को बढ़ा-चढ़ाकर नहीं दिखाता बल्कि दबा देता है। बिहार में घुसखोरी चरम पर है, लोग आज भी अपराधियों से कम पुलिस से ज्यादा डरते हैं, पुलिस थानों के देखकर लोगों का सिर श्रद्धा से नहीं झुकता बल्कि मुँह से स्वतःस्फूर्त भाव से गालियाँ निकलने लगती हैं,आरटीआई फेल है,आरटीआई कार्यकर्ताओं को जेल है,ग्राम-प्रधान एक ही कार्यकाल में खाकपति से करोड़पति बन जा रहे हैं,इन्दिरा आवास नहीं बनता लेकिन इस मद में पैसे जरूर खर्च हो जा रहे हैं,दूध की गंगा के बदले बिहार में शराब की नदी बह रही है,गाँव-गाँव में शराब की दुकानें खुल गई हैं और नीतीश कुमार फरमाते हैं कि शराब नहीं बेचेंगे तो विकास के लिए पैसा कहाँ से आएगा,इसके साथ ही उनका यह भी कहना है कि वे इन दुकानों से माध्यम से गुणवत्तापूर्ण शराब उपलब्ध करवा रहे हैं, फिर भी बिहार में हर महीने दर्जनों गरीब-गुरबा जहरीली शराब पीने से मर रहे हैं। बिहार के स्कूलों और कॉलेजों में शिक्षक नहीं हैं। बिहार के प्राथमिक विद्यालयों में आज भी ज्यादातर ऐसे शिक्षक नौकरी कर रहे हैं जिनकी नियुक्ति नीतीश के राज में हुई है और जिनके प्रमाण-पत्र नकली हैं अथवा जो ग्राम-प्रधानों के भ्रष्टाचार के कारण नौकरी पा गए हैं। बिहार सरकार में आज भी बिना रिश्वत लिए नौकरी नहीं दी जाती। ताजा प्रमाण बिहार कर्मचारी चयन आयोग द्वारा ली गई सचिवालय सहायक की परीक्षा है जिसमें पैसे लेकर परीक्षा के बाद कॉपियों में हेराफेरी की गई फलस्वरूप पटना उच्च न्यायालय ने नियुक्ति पर रोक लगा दी है। बिहार के आयोगों के घुसखोर सदस्य आज भी इतने अयोग्य हैं कि वे 100-150 त्रुटिरहित प्रश्न भी नहीं चुन पाते। बिजली के बारे में पिछले 8 सालों से सिर्फ दावे और वादे ही किए जा रहे हैं, दलित मंत्री अपने दलित नौकर को अपनी गाय द्वारा बुरी तरह से घायल कर देने पर उसका ईलाज नहीं करवाता बल्कि मरने के लिए उसके घर पर फेंकवा देता है और फिर भी मंत्री बना रहता है। नीतीश शासन-काल में बिहार में एक भी उल्लेखनीय वृहत-उद्योग नहीं लगा है। बिहार में सारी योजनाएँ भ्रष्टाचार की शिकार हैं। बिहार के डॉक्टरों ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की राशि को हड़पने के लिए हजारों कुंआरी कन्याओं के गर्भाशय निकाल लिए फिर भी नीतीश मूकदर्शक बने हुए हैं। मनरेगा में काम करनेवाले 90 प्रतिशत मजदूर फर्जी हैं,जाँच में यह साबित भी हो चुका है फिर भी नीतीश मूकदर्शक हैं। पटना में नाली-निर्माण शुरू हुए पाँच साल से ज्यादा हो गए लेकिन निर्माण पूरा नहीं हुआ है। नीतीश की धर्मनिरपेक्षता भी दिखावा है। जब फारबिशगंज में उनकी पुलिस मुसलमानों का संहार कर रही थी तब नीतीश कहाँ थे?
             मित्रों,कुल मिलाकर नीतीश शासन ऊपर से तो फिटफाट है मगर भीतर से सिमरिया घाट है। जैसे दूर के ढोल सुहावन लगते हैं वैसे ही हमारे कुछ मित्रों को नीतीश का शासन अद्वितीय और अभूतपूर्व लग रहा है। बिहार में नीतीश के समय हुआ विकास बस इतना ही है कि सड़कों के गड्ढे समाप्त हो गए हैं,नई सड़के बनीं हैं और छोटे-मोटे सैंकड़ों पुल बनाए गए हैं,बस। हाँ नीतीश बातें जरूर बड़ी-बड़ी कर रहे हैं। वे जनता को जरूर सब्जबाग दिखा रहे हैं। नीतीश कुमार ने बिहार की शिक्षा का पूर्ण विनाश कर दिया है और पूरे बिहार को शराबी बना दिया है। यह शराब से मिलने वाला कर ही है जिससे बिहार का खर्च चल रहा है। अगर किसी प्रदेश का विनाश कर देना ही विकास है तो मानना ही पड़ेगा कि नीतीश ने बिहार का अद्भुत विकास किया है। तब निस्सन्देह उनके समय में बिहार का अभूतपूर्व विकास हुआ है। अगर बिहार कर्मचारी चयन आयोग को बिहार कुर्मी चयन आयोग बना देना है विकास है तो निश्चित रूप से बिहार नीतीश के समय तीव्र विकास के पथ पर अग्रसर है।

14 टिप्‍पणियां:

Robby Ray ने कहा…

पत्रकार महोदय ...इस तरह बिना किसी सबुत के..बिना किसी जाँच पड़ताल के ..लिखना अच्छी बात नही है ..क्या आपके पास ऐसी कोई पुष्ट सुचना है कि सचिवालय परीक्षा में पैसे के खेल के कारण हाई कोर्ट ने नियुक्ति पर रोक लगाईं है ..किसी वकील से पुरी बात तो पता कर लेते ..एक दो सवाल गलत पूछे गए थे ..पर ये सभी परीक्षार्थियों के लिए वे गलत थे पर फेल होने वाले लड़कों को कोई बहाना चाहिए... अपने फेल होने जका ठीकरा कभी आउट ऑफ़ सिलेबस सवाल कभी परीक्षा में कड़ाई पर फोड़ते रहते है |
आपका यह मानना भी सही नही है की आयोग १५० सवालों में से सभी को इसलिए सही सेट नही करता क्योकि इससे भ्रस्टाचार का स्कोप बन जाता है ..ऐसा कुछ भी नही होता क्योकि गलत सवाल सभी के लिए सामान थे | फिर देश की किसी भी संस्था का उदहारण दे दीजिए जिससे मानवीय गलतियाँ नही होतीं है ...झारखण्ड , मध्य प्रदेश कर्णाटक , राजस्थान ,अपन्जब , छतीसगढ़ ...न जाने कितने ही राज्यों में ऐसा हुवा है ..यह कोई पहली बार नही है ... फिर जब ऐसे सवालों को हटा ही दिया गया तब शिकायत का आधार ही समाप्त हो जाता है | बोलिए तो मै upsc में पूछे गए संधिग्ध सवालों के लिस्ट दे दूँ | पर बाहर में लफुवों की संख्या जरा कम है हमारे यहाँ लफुओ की कमी नही है हमारे यहाँ .. चिट पुर्जा से पास करने वाले प्रतियोगिता परीक्षा में सेटिंग बाजी और कोर्ट बाजी के चक्क्कर में रहते है ..इसलिए मामला लटका हुवा है ...एक दिन कोर्ट दूध का दूध पानी का पानी अलग कर देगा ...तब ये लफुवे कोर्ट पर भी आरोप लगाएंगे . बहुत दिनों बाद अब बिहार में प्रतियोगिता परीक्षा में भ्रस्टाचार पर रोक लगी है ... इसलिए कुछ निहित स्वार्थी तत्त्व, सेटिंग बाजी लोगो को यह पच नही रहा है .. ..कोर्ट का मामला है..अधिक नही कहूँगा ... कोर्ट से जरुर न्याय मिल्रेगा ..अब लफुवाबाजी नही चलेगी

बेनामी ने कहा…

पगलेट दास लिखने से पहले दो चार बोतल दारु चढ़ा लिया करते हो क्या ... बिना किसी सबुत के बकवास लिख दिया की सचिवालय परीक्षा में पैसे के खेल के कारण हाई कोर्ट ने नियुक्ति पर रोक लगाईं है ..किसी वकील से पुरी बात तो पता कर लेते ..एक दो सवाल गलत पूछे गए थे ..सभी परीक्षार्थियों के लिए वे गलत थे पर फेल होने वाले लड़कों को कोई बहाना चाहिए... अपने फेल होने जका ठीकरा कभी आउट ऑफ़ सिलेबस सवाल कभी परीक्षा में कड़ाई पर फोड़ते रहते है | ऐसे लफुओ की कमी नही है हमारे यहाँ .. चिट पुर्जा से पास करने वाले प्रतियोगिता परीक्षा में सेटिंग बाजी और कोर्ट बाजी के चक्क्कर में रहते है ..इसलिए मामला लटका हुवा है ...एक दिन कोर्ट दूध का दूध पानी का पानी अलग कर देगा ...तब तेरे जैसे लफुवे कोर्ट पर भी आरोप लगाएंगे . बहुत दिनों बाद अब बिहार में प्रतियोगिता परीक्षा में भ्रस्टाचार पर रोक लगी है ... इसलिए कुछ निहित स्वार्थी तत्त्व, सेटिंग बाजी लोगो को यह पच नही रहा है ..वैसे तुम्हारे लिखने से क्या होता है ..कोर्ट का मामला है कोर्ट से जरुर न्याय मिल्रेगा ..अब तुम जैसे लोगो की लफुवाबाजी नही चलेगी

ब्रजकिशोर सिंह ने कहा…

मित्र,मैंने तो पूरी जिन्दगी में कभी दारू को हाथ तक नहीं लगाया है लेकिन लगता है कि आप जरूर बिहार कर्मचारी चयन आयोग में हुई धांधली के लाभान्वितों मं से हैं। अगर यूपीएससी या किसी भी परीक्षा में सारे प्रश्न सही नहीं होते तो इसका मतलब यह नहीं है कि वहाँ अव्यवस्था नहीं है या वे ऐसा करके अच्छा कर रहे हैं। गलत गलत होता है चाहे वो बीपीएससी करे या यूपीएससी या बीएसएससी। मैंने यूँ ही आरोप नहीं लगाए थे बल्कि उस दिन अखबारों में जो रिपोर्टिंग छपी थी उसके आधार पर लगाए थे और आपको यह पता होना चाहिए कि अखबारों के न्यायालय संवाददाता वकील भी होते हैं। मैंने बीएसएससी को चैलेंज किया था कि वो हमारे सही-गलत प्रश्नों और सफल उम्मीदवारों की जाति के बारे में जानकारी दे। क्यों नहीं दे रही बीएसएससी जानकारी? क्या इसलिए नहीं क्योंकि इससे उसकी धांधली उजागर हो जाएगी? मुझे स्वमूल्यांकन के अनुसार 448 अंक आने चाहिए जबकि मुझे 389 दिए गए हैं। मैं जानना चाहता हूँ कि ऐसा कैसे हो गया। अब अगर बीएसएससी नहीं बताएगी तो कौन बताएगा? अगर धांधली नहीं हुई है तो वो सही और गलत प्रश्नों की संख्या क्यों छिपा रही है? अगर वहाँ धांधली नहीं होता है तो फिर 19-20 अक्तूबर जो लोग गिरफ्तार हुए थे वे कौन थे?

ब्रजकिशोर सिंह ने कहा…

मित्र,बीएसएससी में आधी रात में घुसकर कॉपियों में हेरा-फेरी करते जो 17 लोग 19-20 अक्तूबर को गिरफ्तार हुए थे उनके खिलाफ समय पर चार्जशीट नहीं की गई जिससे वे लोग जमानत पर रिहा हो गए। अगर इसमें सरकार सीधे-सीधे शामिल नहीं होती तो उनको जमानत नहीं मिल पाती और समय पर चार्जशीट दाखिल कर दिया गया होता। इसलिए आपका यह कहना कि मेरे आरोपों में दम नहीं है हास्यास्पद है। मैं आज भी अपनी बात पर कायम हूँ क्योंकि परिस्थितियाँ तो इसी ओर इशारा कर रही हैं कि बीएसएससी आपादमस्तक धांधली में डूबी हुई है और इस कार्य में उसको सरकार का वरदहस्त भी प्राप्त है।

बेनामी ने कहा…

अभद्र भाषा का उपयोग के लिए क्षमा करें ब्रज भाई | मगर तीन चार सालों से कोर्ट के चक्कर में हमने इतना झेला है की अब बर्दाश्त नही होता | केवल बीएसएससी की बात नही है , बीपीएससी में भी कोर्ट बाजी के कारण ही इतनी देर हो रही है , अन्यथा अक्तूबर २०१२ में ही मेंस परीक्षा होने वाली थी |
सवाल गलत पूछना कोई इतना बड़ा अपराध नहीं है | यह मानवीय गलती है | कोई भी संस्था इससे परे नही है | आखिर संस्थाओ में भी तो हम जैसे लोग ही काम करते है |इसके आधार पर कोई अभ्यर्थी आयोग पर पक्षपात करने का आरोप लगाए तो बात समझ में नही आती | क्योकि इन गलतियों को सुधारा जा सकता है |फिर ये सवाल तो सभी के लिए गलत थे | आयोग ने अपने प्रारम्भिक माडल आंसर में सुधार करने के लिए अभ्यर्थियों से सुझाव माँगा था , आयोग द्वारा कुछ उत्तरों में सुधार किए भी गए | दुर्भाग्य से अभी भी कुछ सवाल संदिग्ध हैं जिन्हें डीलीट किया जा सकता है |

आयोग से गलतियाँ हुईं है इससे इनकार नही किया जा सकता पर किसी भी संस्था से १००% कार्यकुशलता की आशा रखना व्यवहारिक नही है | इसके आधार पर यह निष्कर्ष नही निकाला जा सकता की आयोग ने बड़े पैमाने पर पैसो का खेल किया है |माना कि आयोग अपनी प्रतिष्ठा के प्रति लापरवाह है ,बार बार गलतियाँ करता है, पर इसके बावजूद इस परीक्षा में बड़े पैमाने में ऐसे लोग भी सफल रहे है जिनका आयोग की इस गलती से कोई लेना देना नही है , अगर आयोग गलत उत्तर सुधरेगा तो ऐसे लोगो के मार्क्स और बढ़ेंगे | मेरे कहने का सीधा अर्थ यह है कि मेरिट के आधार पर लोगो का चयन हुवा है | अगर आप भी अभ्यर्थी है तो आपने भी इस बात पर गौर किया होगा | अगर आपको शक है तो कुछ सफल लोगो को रेंडमली लिस्ट में से निकाल कर उनके बैकग्राउंड के बारे में पता कर लें | जहाँ तक मेरा सवाल है मै इस बारे में आश्वस्त हूँ |

आपने सवाल उठाया है की आयोग सही गलत प्रश्नों के बारे में जानकारी क्यों नही दे रही है | आयोग ने न्यायालय में सारे फैक्ट्स रख दिए है | अगर आयोग के आंसर गलत होंगे तो कोर्ट उनमे जरुर सुधार करवा देगा , इसके लिए आश्वश्त रहें |
रही बात जाति की तो यह जरा अजीब सी मांग है | आयोग को भी शायद नही पता होगा कि किस जाति के कितने लोग सफल रहे है, या पता भी हो ! मुझे नही पता | इसके बारे में मै विशेष नही जानता |

आपको ४४८ के स्थान पर ३९८ मार्क्स कैसे आए है यह आयोग ही बता सकता है |एक बार सावधानी से ओएमआर शीट की कार्बन कापी को आयोग के वेब साईट पर दिए गए आंसर से मिला लें| अगर ऐसा सचमुच है तो आश्चर्य की बात है | क्योंकि पटना के मेरे मित्र समूह में कई लोगो ने मुख्य परीक्षा दी थी और ऐसा किसी के साथ नही हुवा है |दुर्भाग्य से इनमे अधिकतर असफल है और कुछ सफल है पर सभी के मार्क्स उतने ही है जितने की ओएमआर शीट और आयोग के आंसर को मिलाने से आ रहे है | इस तरह की शिकायत किसी की नही है |

मै एक बार फिर से यही कहूँगा , अखबारों की बातो पर आँखें मूंद कर भरोसा ना करें , आप स्वयं पत्रकार है आपको यह बात अच्छी तरह पता ही होगा कि आजकल रिपोर्टिंग सुनी सुनाई बातों के आधार पर ही की जाती है | तथ्यों को जांचने परखने का काम कोई नही करता | जिस तरह आप आयोग से पीड़ित है , सफल अभ्यर्थी भी इसी तरह के पीड़ा से ग्रसित है | आयोग अगर कार्य कुशल होता तो ना ही हमें कोई तकलीफ होती ना ही असफल लोगो को कोई शिकायत होती |

Robby Ray ने कहा…

अभद्र भाषा का उपयोग के लिए क्षमा करें ब्रज भाई | मगर तीन चार सालों से कोर्ट के चक्कर में हमने इतना झेला है की अब बर्दाश्त नही होता | केवल बीएसएससी की बात नही है , बीपीएससी में भी कोर्ट बाजी के कारण ही इतनी देर हो रही है , अन्यथा अक्तूबर २०१२ में ही मेंस परीक्षा होने वाली थी |
सवाल गलत पूछना कोई इतना बड़ा अपराध नहीं है | यह मानवीय गलती है | कोई भी संस्था इससे परे नही है | आखिर संस्थाओ में भी तो हम जैसे लोग ही काम करते है |इसके आधार पर कोई अभ्यर्थी आयोग पर पक्षपात करने का आरोप लगाए तो बात समझ में नही आती | क्योकि इन गलतियों को सुधारा जा सकता है |फिर ये सवाल तो सभी के लिए गलत थे | आयोग ने अपने प्रारम्भिक माडल आंसर में सुधार करने के लिए अभ्यर्थियों से सुझाव माँगा था , आयोग द्वारा कुछ उत्तरों में सुधार किए भी गए | दुर्भाग्य से अभी भी कुछ सवाल संदिग्ध हैं जिन्हें डीलीट किया जा सकता है |

आयोग से गलतियाँ हुईं है इससे इनकार नही किया जा सकता पर किसी भी संस्था से १००% कार्यकुशलता की आशा रखना व्यवहारिक नही है | इसके आधार पर यह निष्कर्ष नही निकाला जा सकता की आयोग ने बड़े पैमाने पर पैसो का खेल किया है |माना कि आयोग अपनी प्रतिष्ठा के प्रति लापरवाह है ,बार बार गलतियाँ करता है, पर इसके बावजूद इस परीक्षा में बड़े पैमाने में ऐसे लोग भी सफल रहे है जिनका आयोग की इस गलती से कोई लेना देना नही है , अगर आयोग गलत उत्तर सुधरेगा तो ऐसे लोगो के मार्क्स और बढ़ेंगे | मेरे कहने का सीधा अर्थ यह है कि मेरिट के आधार पर लोगो का चयन हुवा है | अगर आप भी अभ्यर्थी है तो आपने भी इस बात पर गौर किया होगा | अगर आपको शक है तो कुछ सफल लोगो को रेंडमली लिस्ट में से निकाल कर उनके बैकग्राउंड के बारे में पता कर लें | जहाँ तक मेरा सवाल है मै इस बारे में आश्वस्त हूँ |

आपने सवाल उठाया है की आयोग सही गलत प्रश्नों के बारे में जानकारी क्यों नही दे रही है | आयोग ने न्यायालय में सारे फैक्ट्स रख दिए है | अगर आयोग के आंसर गलत होंगे तो कोर्ट उनमे जरुर सुधार करवा देगा , इसके लिए आश्वश्त रहें |
रही बात जाति की तो यह जरा अजीब सी मांग है | आयोग को भी शायद नही पता होगा कि किस जाति के कितने लोग सफल रहे है, या पता भी हो ! मुझे नही पता | इसके बारे में मै विशेष नही जानता |

आपको ४४८ के स्थान पर ३९८ मार्क्स कैसे आए है यह आयोग ही बता सकता है |एक बार सावधानी से ओएमआर शीट की कार्बन कापी को आयोग के वेब साईट पर दिए गए आंसर से मिला लें| अगर ऐसा सचमुच है तो आश्चर्य की बात है | क्योंकि पटना के मेरे मित्र समूह में कई लोगो ने मुख्य परीक्षा दी थी और ऐसा किसी के साथ नही हुवा है |दुर्भाग्य से इनमे अधिकतर असफल है और कुछ सफल है पर सभी के मार्क्स उतने ही है जितने की ओएमआर शीट और आयोग के आंसर को मिलाने से आ रहे है | इस तरह की शिकायत किसी की नही है |

मै एक बार फिर से यही कहूँगा , अखबारों की बातो पर आँखें मूंद कर भरोसा ना करें , आप स्वयं पत्रकार है आपको यह बात अच्छी तरह पता ही होगा कि आजकल रिपोर्टिंग सुनी सुनाई बातों के आधार पर ही की जाती है | तथ्यों को जांचने परखने का काम कोई नही करता | जिस तरह आप आयोग से पीड़ित है , सफल अभ्यर्थी भी इसी तरह के पीड़ा से ग्रसित है | आयोग अगर कार्य कुशल होता तो ना ही हमें कोई तकलीफ होती ना ही असफल लोगो को कोई शिकायत होती |

बेनामी ने कहा…

कमेंट छपने में अनावश्यक देरी होती है |या लगता है मेरे कमेंट स्पैम में चले जाते है| सुबह एक कमेंट लिखा था अभी तक नजर नही आया |दुबारा पोस्ट कर सहा हूँ
................
अभद्र भाषा का उपयोग के लिए क्षमा करें ब्रज भाई | मगर तीन चार सालों से कोर्ट के चक्कर में हमने इतना झेला है की अब बर्दाश्त नही होता | केवल बीएसएससी की बात नही है , बीपीएससी में भी कोर्ट बाजी के कारण ही इतनी देर हो रही है , अन्यथा अक्तूबर २०१२ में ही मेंस परीक्षा होने वाली थी |
सवाल गलत पूछना कोई इतना बड़ा अपराध नहीं है | यह मानवीय गलती है | कोई भी संस्था इससे परे नही है | आखिर संस्थाओ में भी तो हम जैसे लोग ही काम करते है |इसके आधार पर कोई अभ्यर्थी आयोग पर पक्षपात करने का आरोप लगाए तो बात समझ में नही आती | क्योकि इन गलतियों को सुधारा जा सकता है |फिर ये सवाल तो सभी के लिए गलत थे | आयोग ने अपने प्रारम्भिक माडल आंसर में सुधार करने के लिए अभ्यर्थियों से सुझाव माँगा था , आयोग द्वारा कुछ उत्तरों में सुधार किए भी गए | दुर्भाग्य से अभी भी कुछ सवाल संदिग्ध हैं जिन्हें डीलीट किया जा सकता है |

आयोग से गलतियाँ हुईं है इससे इनकार नही किया जा सकता पर किसी भी संस्था से १००% कार्यकुशलता की आशा रखना व्यवहारिक नही है | इसके आधार पर यह निष्कर्ष नही निकाला जा सकता की आयोग ने बड़े पैमाने पर पैसो का खेल किया है |माना कि आयोग अपनी प्रतिष्ठा के प्रति लापरवाह है ,बार बार गलतियाँ करता है, पर इसके बावजूद इस परीक्षा में बड़े पैमाने में ऐसे लोग भी सफल रहे है जिनका आयोग की इस गलती से कोई लेना देना नही है , अगर आयोग गलत उत्तर सुधरेगा तो ऐसे लोगो के मार्क्स और बढ़ेंगे | मेरे कहने का सीधा अर्थ यह है कि मेरिट के आधार पर लोगो का चयन हुवा है | अगर आप भी अभ्यर्थी है तो आपने भी इस बात पर गौर किया होगा | अगर आपको शक है तो कुछ सफल लोगो को रेंडमली लिस्ट में से निकाल कर उनके बैकग्राउंड के बारे में पता कर लें | जहाँ तक मेरा सवाल है मै इस बारे में आश्वस्त हूँ |

आपने सवाल उठाया है की आयोग सही गलत प्रश्नों के बारे में जानकारी क्यों नही दे रही है | आयोग ने न्यायालय में सारे फैक्ट्स रख दिए है | अगर आयोग के आंसर गलत होंगे तो कोर्ट उनमे जरुर सुधार करवा देगा , इसके लिए आश्वश्त रहें |
रही बात जाति की तो यह जरा अजीब सी मांग है | आयोग को भी शायद नही पता होगा कि किस जाति के कितने लोग सफल रहे है, या पता भी हो ! मुझे नही पता | इसके बारे में मै विशेष नही जानता |

आपको ४४८ के स्थान पर ३९८ मार्क्स कैसे आए है यह आयोग ही बता सकता है |एक बार सावधानी से ओएमआर शीट की कार्बन कापी को आयोग के वेब साईट पर दिए गए आंसर से मिला लें| अगर ऐसा सचमुच है तो आश्चर्य की बात है | क्योंकि पटना के मेरे मित्र समूह में कई लोगो ने मुख्य परीक्षा दी थी और ऐसा किसी के साथ नही हुवा है |दुर्भाग्य से इनमे अधिकतर असफल है और कुछ सफल है पर सभी के मार्क्स उतने ही है जितने की ओएमआर शीट और आयोग के आंसर को मिलाने से आ रहे है | इस तरह की शिकायत किसी की नही है |

मै एक बार फिर से यही कहूँगा , अखबारों की बातो पर आँखें मूंद कर भरोसा ना करें , आप स्वयं पत्रकार है आपको यह बात अच्छी तरह पता ही होगा कि आजकल रिपोर्टिंग सुनी सुनाई बातों के आधार पर ही की जाती है | तथ्यों को जांचने परखने का काम कोई नही करता | जिस तरह आप आयोग से पीड़ित है , सफल अभ्यर्थी भी इसी तरह के पीड़ा से ग्रसित है | आयोग अगर कार्य कुशल होता तो ना ही हमें कोई तकलीफ होती ना ही असफल लोगो को कोई शिकायत होती |

ब्रजकिशोर सिंह ने कहा…

रॉब्बी जी मैं आँख मूँदकर किसी पर विश्वास नहीं करता लेकिन जब 17-17 लोग आधी रात को बीएसएससी कार्यालय में घुसकर कॉपियों में हेराफेरी करते पकड़े जाएँ और बाद में चार्जशीट दायर करने में जानबूझकर देरी कर उनको जमानत दिलवा दी जाए तो कैसे शक नहीं हो? जहाँ तक उत्तर पत्रक से मिलाने की बात है तो मैं कई-कई बार मिला चुका हूँ और हर बार मैंने पाया है कि मुझे 448 अंक आने चाहिए। नियुक्ति में देरी से हम भी परेशान हैं लेकिन अगर सरकार खुद ही देरी चाहती है तो क्या किया जा सकता है? अब शिक्षक परीक्षा को ही लें तो राज्य सरकार ने परीक्षा ले ली सफल घोषित भी कर दिया परन्तु सामान्य परीक्षार्थियों की नियुक्ति कब की जाएगी कोई नहीं बता रहा।

ब्रजकिशोर सिंह ने कहा…

मित्र,आयोग को जाति कैसे पता नहीं होगा? उसके पास आरक्षित कोटे से आनेवाले उम्मीदवारों का जाति प्रमाण-पत्र तो होगा ही जो उसने जमा करवाए हैं।

ब्रजकिशोर सिंह ने कहा…

मित्र,अभ्यर्थियों के सही-गलत उत्तरों की संख्या जब कोर्ट को बता दिया है तो हमें क्यों नहीं बताया जा रहा जबकि पीटी के समय आयोग ऐसा कर भी चुका है?

बेनामी ने कहा…

आप बेहद संवेदनशील इंसान है , यह विभिन्न मुद्दों पर आपके लेखन से स्पष्ट है |
आपके मार्क्स कैसे कम कर दिए गए यह आयोग ही बता सकता है | मुझे आयोग की कार्यप्रणाली के बारे में अधिक जानकारी नही है | बहुत पहले अखबारों में पढ़ा था कि कुछ लोगो को आयोग के स्ट्रांग रूम में सेंध लगाने के लिए गिरफ्तार किया गया था |पर ये तो हमारे मुख्य परीक्षा से पहले की घटना है | इन लोगो को जमानत मिल गई, यह भी मुझे नही पता था |अगर सरकार की तरफ से इनपर चार्जशीट दाखिल करने मे देरी के कारण इन्हें जमानत मिल गई है तो यह निंदनीय है |इस तरह के गिरोहों पर कड़ी से कड़ी कारवाई होनी चाहिए थी | अफसोस की बात है कि इस चूक बारे में अखबारों में खबर नही आई |इस तरह से गलत रास्ते का उपयोग कर जब अयोग्य और भ्रष्ट लोग सरकार के कर्मचारी बनेंगे तो उनसे कार्यकुशलता या इमानदारी की उम्मीद करना ही बेकार होगा |
पर इस परीक्षा में धांधली की बात पर विशवास करना जरा कठिन है , क्योकि बड़ी संख्या में योग्य लोगो का चयन हुवा है ,मै सफल लोगो में से सबको तो नही जानता पर जितने लोगो को जनता हूँ उनमें से अधिकतर पहले ही सेन्ट्रल एसएससी , रेलवे , या अन्य किसी न किसी प्रतियोगिता परीक्षा में सफल लोगो में से है | जाहिर सी बात है उनमे टैलेंट होगा |

आप बहुत अच्छे लेखक है | आपके कई बातो से मै सहमत हूँ | बिहार के शासनतंत्र की कमजोरियाँ ही इस गड़बड़ झाले का मुख्य कारण है | बस इस परीक्षा में बड़े पैमाने पर धांधली वाली बात से असहमत होने के लिए मजबूर हूँ क्योकि तथ्यों के आधार पर यही सही लग रहा है |

आशा है कि न्यायलय के निर्णय से सभी पक्षों को राहत मिलेगी या कम से कम कुछ संतुष्टि तो जरुर मिलेगी , अगर परीक्षा में धांधली हुई है तो कोर्ट इसे मान्यता नही देगा , अगर गलतियाँ हुई है तो इसमे सुधार करने का आदेश देगा | न्यायालय के निर्णय तक हम बस इन्तजार कर सकते है | इससे पहले मिडिया रिपोर्ट्स के आधार पर किसी निर्णय पर पहुचना मुश्किल है |बस अब इन्तजार , जल्दी से यह मामला सुलझे | अगर एग्जाम रद्द भी हो तो फर्क नही पड़ता क्योकि कई दुसरे एक्साम्स भी है केवल एक एग्जाम के भरोसे बिहार के विद्यार्थी नही रहते |
मेरी यही कमाना है कि सभी को न्याय मिले और जल्दी मिले | कोर्ट के चक्कर से सभी को मुक्ति मिले | न्याय में देरी भी एक प्रकार का उत्पीडन ही है | और बिहार के न्यायलय तो एक्साम्स पर स्टे लगाने में सबसे आगे रहते है| न्यायलय के इस रवैये के कारण ही मेंस एग्जाम होने में ही सालों लग गए है | आशा है कि इस मामले में न्यायलय जल्दी से कोई फैसला सुनाएगा | जो भी हो जल्दी हो , ताकि इस मामले से निबट कर लोग आगे बढे , क्योकिं आगे बढ़ने का नाम ही जिंदगी है .. एक रास्ता बंद होता है हजार खुलतें है |

होली की हार्दिक शुभकामना |

बेनामी ने कहा…

ek hii tippani do baar chali gayi hai ..kripya kisi ek ko delete kar de.

ब्रजकिशोर सिंह ने कहा…

रॉब्बी जी आपको भी होली की शुभकामनाएँ और मुझे शुभकामना भेजने के लिए धन्यवाद भी।

ब्रजकिशोर सिंह ने कहा…

मित्र,17 अभियुक्तों को जमानत मिलने की खबर अभी भी इंटरनेट पर मौजूद है जिसे आप गूगल पर शीर्षक टाईप कर सर्च कर सकते हैं। खबर जो जनवरी के अंत में दैनिक जागरण में प्रकाशित हुई थी इस प्रकार थी-
आरोपपत्र दायर नहीं,17 अभियुक्तों को जमानत
पटना, न्यायालय संवाददाता : बिहार कर्मचारी चयन आयोग के स्ट्रांग रूम में घुसकर परीक्षा की कापियां में हेरफेर करने के मामले में पकड़े गए अभियुक्तों के खिलाफ समय सीमा के भीतर आरोपपत्र दायर नहीं हुआ। जिसका लाभ इन्हें मिला और सोमवार को सीजेएम की अदालत ने सभी 17 आरोपियों को नियमित जमानत दे दी। जमानत आदेश में अदालत ने इस बात पर नाराजगी जताई है कि इस मामले के अनुसंधानकर्ता ने अभी तक आरोपपत्र व केस डायरी अदालत में जमा नहीं की है। आरोपी पिछले वर्ष 21 अक्टूबर से जेल में हंै। उन्हें जेल में रहते 92 दिन बीत चुके हैं। कांड के अनुसंधान का जिम्मा इंस्पेक्टर अशोक कुमार पर है। ज्ञातव्य हो कि पिछले वर्ष 20 अक्टूबर को आर्थिक अपराध शाखा ने इस मामले में आइपीसी की धारा 420, 468, 472 और 120बी के तहत प्राथमिकी दर्ज कराई थी। आर्थिक अपराध शाखा को गुप्त सूचना मिली थी कि बिहार कर्मचारी चयन आयोग द्वारा आडिटरों की बहाली के लिये ली गयी परीक्षा में हेरफेर हो रही थी। यह परीक्षा 7 अक्टूबर को हुई थी। इस काम में पूरा गिरोह सक्रिय है। इसमें आयोग के कर्मचारी की मिलीभगत है। गिरोह के सदस्य आयोग के स्ट्रांग रूम में रात एक बजे प्रवेश करते हैं और कापियों में हेरफेर कर निकल जाते हैं।