शुक्रवार, 25 अक्तूबर 2019

भाजपा को झटका जनता का फटका


मित्रों, इस साल जबसे भाजपा लोकसभा चुनाव जीती है एक अलग ही मूड में है. इस समय भाजपा की मनोदशा ठीक वैसी ही है जैसी कांग्रेस की २००९ का चुनाव जीतने के बाद थी. उसका और उसके शीर्षस्थ नेता द्वय का घमंड दोबारा केंद्र में सरकार के गठन के बाद से ही सातवें आसमान पर है. भाजपा के शीर्ष नेता जनता को भेड़ और खुद को चरवाहा समझ रहे हैं और उनको लगता है कि वे उनको जिधर हांक देंगे वे बिना किसी नानुकर के उधर ही चल देंगे.
मित्रों, इस बारे में मुझे एक किस्सा याद आ रहा है. बिहार की राजनीति में एक बहुत बड़े नेता हुए हैं नाम था-सत्येन्द्र नारायण सिन्हा. १९८५ में कांग्रेस के बिहार विधानसभा चुनाव जीतने के बाद उनकी भेंट महनार (वैशाली) से चुनाव हार चुके वरिष्ठ समाजवादी नेता मुनीश्वर प्रसाद सिंह से पटना में हुई. मुनीश्वर बाबू जाहिर है कि बड़े उदास थे. तब सत्येन्द्र बाबू ने चुटकी लेते हुए मुनीश्वर बाबू को कहा था कि तुम कैसे चुनाव हार जाते हो हम तो हर बार जीत जाते हैं चाहे हम जनता के लिए कुछ करें या न करें.
मित्रों, उन्हीं सत्येन्द्र बाबू को बाद में कई बार हार का सामना करना पड़ा और गुमनामी में दिन काटना पड़ा. कहने का तात्पर्य यह है कि जनता किसी की गुलाम नहीं है बल्कि मनमौजी है. जब मौज चढ़ा तो एक चायवाले को भी राजा बना देती है जब गुस्सा आया तो सत्येन्द्र बाबू जैसे राजा को भी सड़क पर ला देती है. मुझे लगता है मोदी और शाह सत्ता के नशे में अभी इस बात को समझ नहीं पा रहे हैं या फिर समझकर भी नहीं समझना चाहते हैं.
मित्रों, पिछले कई चुनावों से हम देख रहे हैं कि भाजपा जमीन से जुड़े मुद्दों को झुठलाकर हवाई मुद्दों के आधार पर चुनाव जीतने का प्रयास करती रही है. देश की जनता कितनी परेशान है इस बात से जैसे उसका कोई सरोकार ही नहीं रह गया है. देश में छाई मंदी और उससे उपजी बेरोजगारी, महंगाई और बैंकों की खस्ता हालत और महँगी होती बैंकिंग सेवा ने लोगों का जीना मुश्किल कर रखा है लेकिन मोदी देश को चाँद दिखा रहे हैं. अभी महाराष्ट्र और हरियाणा में चुनाव होना था तो पाकिस्तान पर हमला बोल दिया. मतदान ख़त्म,हमला समाप्त. जबकि केंद्र सरकार को इस बात की चिंता होनी चाहिए कि कश्मीर से सेब देश में कैसे पहुंचेगा क्योंकि आतंकवादी सेब बेचनेवाले किसानों और सेब खरीदनेवाले व्यापारियों दोनों की लगातार हत्या कर रहे हैं. सवाल उठता है कि क्या केंद्र सरकार में इतना दम है कि वो कश्मीरी सेब उत्पादकों में भरोसा पैदा कर सके?
मित्रों, पिछले कुछ सालों में भाजपा ने दूसरे दलों से जमकर नेताओं का आयात किया है और उनको अपने कार्यकर्ताओं पर थोप दिया है. साथ ही जमकर मशहूर हस्तियों को भी टिकट बांटा गया है. इन चुनावों ने भाजपा को बता दिया है कि अब ऐसा नहीं चलेगा। बल्कि अब जनता पार्टी के पुराने कार्यकर्ताओं को जिताएगी भले ही वो निर्दलीय उम्मीदवार हो। ये तो हुई पूरे चुनाव परिणाम की बात। जहां तक बिहार का प्रश्न है तो उपचुनावों में पटखनी देकर बिहार की जनता ने भाजपा नेतृत्व को चेतावनी दे दी है कि अब वो नीतीश कुमार की नाकारा सरकार को बर्दाश्त करने की स्थिति में कदापि नहीं है। 

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