शुक्रवार, 29 मई 2026

मोदी सरकार के बारह साल

मित्रों, भारत की संघ में विराजित मोदी सरकार के बारह वर्ष पूरे हो रहे हैं. भारतीय संस्कृति में १२ साल का एक युग माना जाता है. कहने का तात्पर्य यह कि १२ साल का समय काफी ज्यादा होता है और कोई भी सरकार यह नहीं कह सकती कि उसे देश को बदले के लिए जनता ने पर्याप्त समय नहीं दिया. हमें यह भी याद रखना होगा कि मोदी सरकार अच्छे दिनों के वादों के साथ सत्ता में आई थी. लगा था जैसे मोदी सरकार के सत्ता में आते ही दैहिक, दैविक, भौतिक तापा, राम राज काहू नहिं व्यापा जैसी स्थिति आ जाएगी, जनता और राष्ट्र की सारी समस्याएँ एकबारगी समाप्त हो जाएगी. आज बारह साल बाद सवाल उठता है कि क्या ऐसा हुआ? और अगर नहीं हुआ तो क्यों नहीं हुआ? मित्रों, हम बारी-बारी से प्रत्येक महत्वपूर्व मुद्दे पर मोदी सरकार के प्रदर्शन पर पूरी तरह से निष्पक्ष होकर विचार करेंगे. सबसे पहले हम भ्रष्टाचार के मुद्दे को लेते हैं क्योंकि जब २०१४ का चुनाव प्रचार चल रहा था तब तत्कालीन मनमोहन सरकार का ऐसा कोई विभाग था ही नहीं जिस पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप न लगे हों. दुर्भाग्यवश आज भी देश में भ्रष्टाचार की कमोबेश वही स्थिति है जैसी २०१४ में थी. आज भी जब हम किसी भी सरकारी कार्यालय में जाते हैं तो बिना सुविधा शुल्क दिए हमारा कोई काम नहीं होता. भ्रष्टाचार के कारण विदेशी निवेशक भारत में निवेश नहीं करना चाहते. विशेष रूप से शिक्षा, राजस्व और पुलिस विभाग पहले से कहीं ज्यादा भ्रष्ट हैं. मोदी ने २०१४ में विदेशी बैंकों से काला धन वापस लाने के वादे यह कहकर किया था कि प्रत्येक भारतीय के खातों में १५-१५ लाख रूपए विदेशी बैंकों से वापस लाकर डाले जाएँगे लेकिन विदेश से एक पैसा काला धन वापस नहीं लाया गया. लगातार गुजरात से बिहार तक पुल गिर रहे हैं, पानी की टंकियां धराशायी हो रही हैं। उधर, अमेरिकी न्याय विभाग (DoJ) ने गौतम अडानी और उनके भतीजे सागर अडानी के खिलाफ ₹2,500 करोड़ (265 मिलियन डॉलर) के रिश्वतखोरी और धोखाधड़ी के आपराधिक आरोपों को स्थायी रूप से हटा दिया है। मई 2026 की ताजा रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी अदालतों ने इन मामलों को 'विद प्रिजुडिस' (with prejudice) खारिज कर दिया है, जिसका अर्थ है कि इन्हें भविष्य में दोबारा नहीं खोला जा सकता। इस मामले में अडानी पर सौर ऊर्जा परियोजनाओं के लिए भारतीय अधिकारियों को कथित तौर पर रिश्वत देने और अमेरिकी निवेशकों को गुमराह करने का आरोप था। अडानी ने अमेरिकी प्रतिभूति और विनिमय आयोग (SEC) के सिविल आरोपों को सुलझाने के लिए 60 लाख डॉलर (लगभग ₹50 करोड़) का भुगतान करने पर सहमति जताई।केस बंद होने का कारण: अमेरिकी अभियोजकों को मामले को साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत और अमेरिका के साथ कोई स्पष्ट सीधा संबंध नहीं मिला।अमेरिकी निवेश का प्रस्ताव: रिपोर्ट्स के अनुसार, अडानी समूह ने अमेरिका में 10 बिलियन डॉलर (लगभग ₹96,000 करोड़) के निवेश और 15,000 नौकरियां पैदा करने का प्रस्ताव दिया है, जिसे कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में इस कानूनी राहत से जोड़कर देखा जा रहा है। ईधर नॉर्वे के गवर्नमेंट पेंशन फंड ग्लोबल (जो लगभग 2.2 ट्रिलियन डॉलर से अधिक की संपत्ति प्रबंधित करता है) ने अपनी नैतिकता परिषद के सुझावों के आधार पर अडानी समूह पर महत्वपूर्ण प्रतिबंध लगाए:मई 2024: अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन को संघर्ष क्षेत्रों में कथित मानवाधिकार उल्लंघनों के कारण बाहर कर दिया गया。फरवरी 2026: अडानी ग्रीन एनर्जी को भी वित्तीय अनियमितताओं और धोखाधड़ी की चिंताओं के कारण निवेश के लिए अयोग्य कंपनियों की सूची (ब्लैकलिस्ट) में शामिल कर दिया गया। यात्रा पर राजनीतिक विवाद विपक्ष का दावा: विपक्षी नेता राहुल गांधी का आरोप है कि पीएम मोदी की नॉर्वे यात्रा भारत के कूटनीतिक और आर्थिक हितों के बजाय अडानी समूह की साख बचाने और उनके अटके हुए निवेश को बहाल करने के लिए की गई थी। इसी प्रकार अमेरिका के समक्ष मोदी सरकार के आत्मसमर्पण को भी अडानी पर अमेरिका में चल रहे भ्रष्टाचार के मुकदमे से जोड़ कर देखा जा रहा है। मित्रों, रोजगार के मुद्दे पर भी मोदी सरकार पूरी तरह से विफल रही है. कहाँ तो हर साल दो करोड़ रोजगार देने के वादे किए गए थे लेकिन आज भारत में जितनी बेरोजगारी है पहले कभी थी ही नहीं. देश में बेरोजगारी कम करके दिखाने के लिए बातूनी मोदी सरकार ने नई चाल चली है। मतलब नाच न जाने आंगन टेडा. सरकार ने कहा- अगर आप सप्ताह में सिर्फ एक घंटे भी काम करते हैं, तो आपको बेरोजगार नहीं माना जाएगा। लेकिन... बेरोजगारी कम दिखाने के इस पैंतरे के बाद भी देश में 48% लोग बेरोजगार पाए गए हैं- ये जानकारी खुद मोदी सरकार के सांख्यिकी मंत्रालय ने दी है। यह आंकड़ा देश में भयावह बेरोजगारी की कहानी बता रहा है, जहां युवा एक नौकरी के लिए दर-दर भटक रहे हैं और नरेंद्र मोदी महंगा मशरूम खाकर मौज मार रहे हैं। रही बात श्रमिकों को न्यूनतम मजदूरी देने की तो आपको नोएडा-गाज़ियाबाद में एमबीए डिग्री धारक युवा भी बारह-चौदह हज़ार मासिक पर काम करते हुए मिल जाएंगे. कहने का मतलब यह कि आज ईट ढोने वाले उच्च शिक्षा प्राप्त युवकों के कहीं ज्यादा कमा रहे हैं और देश में पढोगे-लिखोगे बनोगे ख़राब वाली स्थिति पैदा हो गई है. मोदी सरकार मानती है कि भजिया तलना अच्छा वैकल्पिक रोजगार है लेकिन यह नहीं बताती कि वर्तमान समय एआई का है और इसमें हम बुरी तरह से पिछड़ चुके हैं. एआई एक तरफ हमारी सॉफ्टवेयर उद्योग को खाता जा रहा है वहीँ इस क्षेत्र में हम ताईवान जैसे छोटे देशों से भी पिछड़ गए हैं चीन और अमेरिका से प्रतियोगिता करना तो दूर की बात है. पहले नोटबंदी,फिर लॉक डाउन और अब रसोई गैस संकट ने देश में बेरोजगारी की स्थिति को विस्फोटक बना दिया है. पिछले दिनों लाखों अप्रवासी श्रमिकों को रसोई गैस न मिलने के चलते घर लौटना पड़ा है. मित्रों,देश में शिक्षा की क्या स्थिति है इसे आप नीट परीक्षा में लगातार लीक हो रहे प्रश्न पत्रों से आसानी से समझ सकते हैं। आप बिहार के किसी भी सरकारी स्कूल में चले जाईए कहीं पढ़ाई नहीं होती। मास्टर आते हैं और बैठकर चले जाते हैं। स्कूल भोजनालय मात्र बन चुके हैं। बिहार के अधिकतर शिक्षक खुद महा अज्ञानी हैं फिर पढ़ाएंगे क्या? कालेजों में चाहे वो सरकारी हों या निजी उनमें भी पढ़ाई गायब है। दुनिया के शीर्ष सौ विश्वविद्यालयों में इस समय भारत का कोई विश्वविद्यालय या शिक्षा संस्थान शामिल नहीं है। अभी सीबीएसई की बारहवीं की कापी जांच में जो धांधली हुई है पूरी दुनिया उसे देख रही है। एक ऐसी एजेंसी को कापी जांच का काम दे दिया गया जो पहले से ही बहुत बदनाम थी। क्या ऐसा बिना मोटी रिश्वत लिए किया गया होगा? हमारे शिक्षक जिनको प्रश्न पत्र सेट करने का काम दिया जाता है खुद पैसे लेकर प्रश्न पत्र आऊट कर दे रहे हैं। बाद में शिक्षा मंत्री के साथ उनकी तस्वीर सामने आती है। हर जगह शिक्षा के क्षेत्र में संघियों को बिठा दिया गया है और उनको दोनों हाथों पैसे बनाने की खुली छूट दे दी गई है। इतना ही नहीं ज्यादातर निजी शैक्षिक संस्थान खुद नेताओं ने खोल रखे हैं। सरकारी विद्यालयों में पढ़ाई नहीं होने से निजी विद्यालयों को लूट की खुली छूट मिल गई है। मित्रों, स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी मोदी सरकार पूरी तरह से असफल सिद्ध हुई है। देश के सरकारी अस्पतालों में लोग मरने और निजी अस्पतालों में सबकुछ लुटाने जाते हैं। ऊपर से सरकार निजी अस्पतालों को मुफ्त में सैंकड़ों एकड़ जमीन देती है जिसका कोई लाभ जनता को नहीं होता। कई अस्पताल तो खुद नेताओं के हैं‌। मित्रों,2014 में मोदी ने जनता से एक और वादा किया था और वो वादा था त्वरित न्याय देने का। दुर्भाग्यवश इस मोर्चे पर भी मोदी सरकार पूरी तरह और बुरी तरह विफल साबित हुई है क्योंकि आज भी एक मुकदमे के निबटारे में औसतन 10 साल का लंबा वक्त लगता है। आज भी कालेजियम सिस्टम परिचालन में है। न्याय सिर्फ अमीर और प्रभावशाली लोगों के लिए है और गरीबों को मिलती है सिर्फ तारीख। बाबा राम रहीम सिंह दोषी साबित होने के बाद भी बार-बार जेल से बाहर आता है लेकिन विष्णु तिवारी निर्दोष होने के बावजूद बीस सालों तक जेल में रहता है और अपनी मां और भाइयों के दाह-संस्कार के लिए भी बाहर नहीं आ पाता‌। मित्रों, वैश्विक कूटनीति में आज भारत की जितनी बुरी स्थिति है कदाचित भूतकाल में कभी नहीं थी। प्रधानमंत्री बनने से पहले जो मोदी कहा करते थे कि न आंख झुकाऊंगा और न आंख दिखाऊंगा आज अमेरिका के आगे दंडवत हैं। अमेरिका भारत पर पचास प्रतिशत टैरिफ लगाता है मगर भारत बदले में कोई कार्रवाई नहीं करता बस हाथ जोड़कर खड़ा रहता है। यहां तक कि भारत किस देश से तेल खरीदेगा इसका निर्णय भी इन दिनों अमेरिका ले रहा है। लगता है जैसे भारत पर अमेरिका का कब्जा हो गया है और भारत अमेरिका का 51वां राज्य है। उधर चीन अमेरिका को भाव नहीं देता बल्कि ईरान में हारने के बाद ट्रंप थक-हार कर चीन जाता है लेकिन खाली हाथ वापस आता है। एक अडानी को बचाने के लिए मोदी अमेरिका और नार्वे दो-दो देशों के आगे नतमस्तक हो जाते हैं। मित्रों, अर्थव्यवस्था का तो कहना ही क्या! भारतीय अर्थव्यवस्था इन दिनों चौथे स्थान से फिसलकर छठे स्थान पर आ गई है। रुपया शतक लगाने वाला है। शेयर बाजार के मामले में हम ताईवान जैसे छोटे देश से भी नीचे चले गये हैं। तो ऐसा है मोदी सरकार के समय निवेशकों का भारत पर विश्वास. एआई हमारी साफ्टवेयर इंडस्ट्री को निगलने लगा है और हम एआई के क्षेत्र में कहीं हैं ही नहीं। आखिर बदहाल शिक्षा व्यवस्था से भजिया तलनेवाले ही तैयार हो सकते हैं एआई विशेषज्ञ नहीं। हमारा निर्यात भी चीन से होनेवाले आयात पर निर्भर है‌‌। अमेरिकी टैरिफ के कारण हमारे हाथों से हमारी वस्तुओं का सबसे बड़ा आयातक भी छिन गया है। ईधर ईरान-अमेरिका युद्ध के चलते अरब देशों को होने वाला निर्यात भी बंद है। कोढ़ में खाज यह कि कभी चीन हमारे चावल वापस कर दे रहा है तो कभी जापान हमसे आम खरीदने से मना कर दे रहा है‌। भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के प्रावधान बता रहे हैं भारत सरकार ने भारत के किसानों के हित भी अमेरिका के हाथों बंधक रख दिया है। महंगाई चरम पर है, आम आदमी की आमदनी लगातार घट रही है। लोगों की बचत कम हो रही है कर्ज बढ़ रहा है. देश का व्यापार घाटा आसमान छू रहा है और चीख-चीख कर कह रहा है मेक ईन इंडिया सिर्फ जुमला था‌‌। सेवा क्षेत्र धराशायी है, कृषकों को खाद नहीं मिल रहा और विनिर्माण क्षेत्र नोटबंदी के समय से ही गोते खा रहा है। कुल मिलाकर भारत आज आयात प्रधान अर्थव्यवस्था बनकर रह गया है जैसे अंग्रेजों के समय था। मोदी सरकार को बस अपने चंद उद्योगपति मित्रों से मतलब है बांकी जनता वस्त्र-भोजन और शिक्षा-स्वास्थ्य विहीन हो जाए कोई बात नहीं। कब किस उद्योगपति को ईडी के माध्यम से कंगाल कर दिया जाए और नीलामी में हेराफेरी कर उसकी कंपनी को अडानी के हवाले कर दिया जाए कोई नहीं जानता। मानो विविध भारती पर मोदी गा रहे हैं अब अडानी के हवाले वतन साथियों। मित्रों, घुसपैठ के खिलाफ भी मोदी सरकार शोर तो खूब मचा रही है लेकिन काम कुछ खास नहीं हुआ है। मुस्लिम तुष्टिकरण अब एससी तुष्टिकरण में बदल चुका है और एससी-एसटी एक्ट में झूठे मुकदमों से परेशान सवर्ण समाज को यूजीसी नोटिफिकेशन लाकर शिक्षा से भी वंचित करने की गंदी साजिश रची जा रही है। बारह साल में एक बार भी प्रेस कांफ्रेंस नहीं करनेवाले मोदी इन दिनों खुद आनेवाले समय को कठिन बताकर जनता को तैयार रहने के लिए कहते फिर रहे हैं। अच्छे दिन तो आए नहीं बुरे दिन जरूर आ गये हैं और न जाने इस चायवाले, अनपढ़, अभिनय सम्राट के कार्यकाल में देश की जनता को क्या-क्या दुख झेलना पड़ेगा‌। हां,भाजपा इस समय जरूर हजारों करोड़ के पार्टी फंड का सुख जमकर भोग रही है। मोदी के साथ-साथ उसके मंत्री भी नितांत अयोग्य हैं और अपनी आनेवाली सात पीढ़ियों के लिए धनार्जन में पूरे मनोयोग से जुटे पड़े हैं। वंशवाद आज जितना एनडीए में है उतना इंडी एलायंस में भी नहीं है। नीतीश कुमार का पागल बेटा भी मंत्री बना दिया गया है। मोदी सरकार ने धारा 370 को हटाया जरूर है लेकिन कश्मीरी पंडित वापस अपने घर नहीं जा सके हैं. इसी तरह राम मंदिर भी बन चुका है लेकिन मोदी के अनुसार भारत अब राम का नहीं बुद्ध का देश है. मोदी सरकार का सबसे बड़ा दोगलापन तो तब सामने आता है जब चुनावों के समय हिंदुओं को बंटोगे तो कटोगे का संदेश देनेवाली मोदी सरकार सुप्रीम कोर्ट द्वारा असंवैधानिक घोषित कर देने के बाद एससी-एसटी एक्ट को दोबारा लागू कर और यूजीसी नोटिफिकेशन लाकर अपने सबसे कट्टर समर्थक सवर्णों की पीठ में छुरा घोंपने का घृणित कृत्य करती है। अंत में मैं मोदी समर्थक अर्थशास्त्री सुरजीत भल्ला द्वारा इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित आलेख में उल्लिखित पंक्तियों की तरफ देश का ध्यान आकर्षित करना चाहूंगा जो उन्होंने बंगाल और असम में भाजपा की शानदार जीत को लेकर लिखी है मोदीजी आप जीत रहे हैं लेकिन देश हार रहा है।

बुधवार, 6 मई 2026

जय भीम, जय भीम राव कांबले

मित्रों, इन दिनों पुणे में 4 साल की अबोध बच्ची के साथ घटी एक रेप और बेरहमी से की गई हत्या की घटना ने पूरे भारत के मन-मस्तिष्क को झकझोर कर रख दिया है. यहाँ अपराधी का नाम भीमराव कांबले है. मतलब नाम भी बाबा साहेब वाला और जाति भी बाबा साहेब वाली। उम्र जानकर तो आप और भी आश्चर्य में पड़ जाएंगे। 65 साल. मित्रों, इतना ही नहीं मृतक बच्ची कथित रूप से ब्राह्मण जाति की थी. मतलब बलात्कारी महार और पीड़िता ब्राह्मणी। इतना ही नहीं पता चला है कि पुणे की मासूम बच्ची के साथ हैवानियत के आरोप में गिरफ्तार भीमराव कांबले एक आदतन अपराधी है, जिसका पूरा इतिहास क्राइम से भरा हुआ है. साल 2015 में बड़े अपराध में जेल के अंदर गया कांबले छूट गया था. हमारे हाथ लगे दस्तावेजों और कोर्ट आदेशों से साफ हो गया है कि यह पहली बार नहीं, बल्कि उसके हाथ काले कारनामों से रंगे पड़े हैं. साल 2015 में बड़े अपराध में जेल के अंदर गया कांबले छूट गया था. मित्रों, साल 1998 में भीमराव कांबले की क्राइम की दुनिया में पर्दापण हुआ, जब साल 1998 में उसके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 354 (महिला की लज्जा भंग करना) और धारा 452 (हमले की तैयारी के साथ घर में अनधिकृत प्रवेश) के तहत मामला दर्ज किया गया था. इस मामले ने तभी संकेत दे दिए थे कि उसकी गतिविधियां समाज और महिलाओं की सुरक्षा के लिए खतरा हैं. साल 2015 में यौन उत्पीड़न केस में सबूतों के अभाव भीमराव कांबेल छोड़ दिया गया था. इस मामले से संबंधित कोर्ट ऑर्डर की कॉपी भी सामने आई है. मामला अत्यंत गंभीर था, लेकिन कानूनी प्रक्रिया के दौरान अभियोजन पक्ष आरोपों को सिद्ध करने में नाकाम रहा. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसके खिलाफ कोर्ट में पर्याप्त व पुख्ता सबूत पेश नहीं किए जा सके. गौरतलब है तब प्रत्यक्षदर्शियों या तकनीकी साक्ष्यों की कमी के चलते, न्यायालय ने भीमराव कांबले को 'बेनिफिट ऑफ डाउट' देते हुए सबूतों के अभाव में बरी कर दिया था. उसकी यह आपराधिक कुंडली बताती है कि वह पहले भी गंभीर कानूनी पचड़ों में फंस चुका है. भले ही वह अदालत से एक बार तकनीकी आधार पर बच निकला हो, लेकिन उसके खिलाफ दर्ज पुराने मुकदमे उसकी हिंसक और आपराधिक प्रवृत्ति की गवाही देते हैं. अब नए सिरे से उठ रहे सवालों ने प्रशासन को फिर से उसके पुराने रिकॉर्ड को खंगालने पर मजबूर कर दिया है. मित्रों, पुणे में पिछले सप्ताह उसी हजारों सालों से दबे-कुचले व्यक्ति द्वारा चार वर्षीय जिस पुजारी की लड़की की दुष्कर्म के बाद हत्या कर दी गई थी, उसकी पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने दम घुटने से उसकी मौत होने का संकेत दिया है। पुलिस ने बताया है कि 65 वर्षीय आरोपित भीमराव ने पीड़िता के मुंह में मोजा ठूंस दिया था। इससे दम घुटने से उसकी मौत हो गई। पुलिस के अनुसार, आरोपित बच्ची को खाने का लालच देकर बहला-फुसलाकर मवेशी बाड़े में ले गया, जहां उसने उसका यौन उत्पीड़न किया और बाद में उसकी बेरहमी से हत्या कर दी। मृतक मासूम के शरीर पर चोट के भी गहरे निशान पाए गए हैं. मित्रों, अब हम आते हैं अपने मूल विषय पर. सामाजिक न्याय के नए पुरोधा आदरणीय नरेंद्र मोदी जी का एक भाषण हमने देखा है जिसमें वो कहते हैं कि जिनके साल हजारों सालों तक अत्याचार हुए उनको बदला लेने का अवसर मिलना चाहिए। जाहिर है कि वर्ष २०१८ में जब सुप्रीम कोर्ट ने एससी-एसटी एक्ट के अन्यायपूर्ण प्रावधानों को अवैध घोषित करते हुए कहा था कि इस एक्ट में पहले जांच होनी चाहिए फिर गिरफ़्तारी तब महान मोदी जी कथित रूप से हजारों सालों से अत्याचार झेल रही जातियों को बदला लेने का भरपूर अवसर प्रदान करते हुए न सिर्फ पहले गिरफ़्तारी फिर जाँच को फिर से लागू कर दिया बल्कि धाराओं को भी बढाकर २२ से 47 कर दिया। इतना ही नहीं लाखों रूपये के मुआवजे भी दिए जाने लगे. भले ही अदालत में आरोप झूठे साबित हो जाएं और निर्दोष आरोपी का जीवन,कैरियर, घर, परिवार सबकुछ बर्बाद हो जाए लेकिन न तो झूठे आरोप लगानेवालों पर कोई कानूनी कार्रवाई होगी और न ही मुआवजा वापस लिया जाएगा। मित्रों, नतीजा यह है कि एससी-एसटी के लिए यह एक्ट एक तीर से दो शिकार करने का सुअवसर प्रदान कर रहा है. सवर्ण को जेल भेजकर उसके पूर्वजों द्वारा किये गए कथित अत्याचारों का बदला भी ले लिया और जेब में लाखों रूपये भी आ गए. हालाँकि मोदी जी भी जानते हैं कि एक हजार साल तक देश के समस्त हिन्दू क्रमशः मुसलमानों और ईसाइयों के गुलाम थे इसलिए जातीय अत्याचार की कहानियां झूठी हैं. मित्रों, मैं इस आलेख के अंत में प्रधानमंत्री बन जाने के बाद भी पिछड़े से अति पिछड़े हो गए मोदी जी से मांग करता हूँ कि एससी-एसटी एक्ट में एक और बदलाव करके यह प्रावधान कर दें कि जो भी एससी-एसटी वर्ग का व्यक्ति सवर्ण महिलाओं के साथ रेप और फिर उनकी हत्या करेगा उसको अपराध में की गई क्रूरता के अनुसार सजा नहीं बल्कि ईनाम दिया जाएगा। ऐसा प्रावधान करने से ही सामाजिक न्याय पूर्णता को प्राप्त करेगा। साथ ही मैं चंद्रशेखर रावण के उन दावों का भी तहे दिल से समर्थन करता हूँ कि एससी-एसटी आजीवन दबा-कुचला रहेगा भले ही वो वास्तविक रावण की तरह आतताई हो और सोने की लंका में रहता हो. यहाँ तक कि उनको मंदिरों का पुजारी बनाना भी उनके साथ अत्याचार है और ऐसा करनेवालों पर एससी-एसटी एक्ट के तहत कठोर-से-कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए.