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रविवार, 24 मार्च 2013
दिल्ली में सविनय अवज्ञा आंदोलन क्यों,किसका और किसके लिए
मित्रों,भारत की राजनीति में लगातार प्रयोग हो रहे हैं। दुर्भाग्यवश हमारे अधिकतर राजनैतिक दल और राजनेता आज भी यथास्थितिवादी हैं। ऐसे राजनेताओं और दलों की तुलना हम मजे में मच्छर,खटमल या जोंक से कर सकते हैं। कुछ की तुलना जूँ से भी की जा सकती है जो खून पीने के बाद उसका रंग भी बदल देती है। इनमें से कुछ तो पूरी तरह से रंगे सियार हैं तो कुछ सिर्फ अपनी पूँछ रंगकर काम चला रहे हैं। कुछ गिरगिट की तरह रोज रंग बदलते रहते हैं। कुछ मगरमच्छ की तरह आँसू की टंकी हैं तो कुछ ने न केवल बाघ की खाल ही पहन रखी है वरन वे अब बाघ की बोली भी बोलने लगे हैं।
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