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रविवार, 16 नवंबर 2014

नीतीश की भई गति साँप छछूंदर केरी

16 नवंबर,हाजीपुर,ब्रजकिशोर सिंह। मित्रों,रामचरितमानस में एक प्रसंग है कि कैकयी द्वारा वर मांगने के बाद राम वनवास जाने को उद्धत होते हैं। जाने से पहले जब वे अपनी जननी कौशल्या से अनुमति लेने जाते हैं तब उनकी माँ असमंजस में पड़ जाती है कि करूँ तो क्या करूँ? अगर अपने पुत्र को वन जाने से रोकती है तो पति पर वचनभंग का कलंक लगता है और अगर वनवास पर जाने को कहती है पति के प्राण चले जाएंगे। ऐसे में माता कौशल्या की स्थिति वही हो गई थी जैसी कि छुछुंदर को निगल लेने के बाद साँप की हो जाती है। साँप अगर छुछुंदर को निगल जाता है तो मर जाएगा और अगर उगल देता है तो लोकमान्यताओं के अनुसार अंधा हो जाएगा।

मित्रों,लगभग वही स्थिति इन दिनों बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जी की भी है। नीतीश जी ने भाजपा से गठबंधन तोड़ तो दिया मगर लोकसभा चुनावों में बिहार की जनता ने उनके इस कदम को पसंद नहीं किया। घबराहट के मारे उन्होंने अपने चिरशत्रु लालू प्रसाद यादव के साथ नया गठबंधन बनाया और साथ मिलकर विधानसभा चुनाव लड़ा मगर फिर से जनता ने उनकी पार्टी को लालू प्रसाद की पार्टी से आधी ही सीट दी। कहने का तात्पर्य यह कि एक नहीं दो-दो बार दो-दो चुनावों में नीतीश कुमार की पार्टी जदयू को राजद के मुकाबले आधी ताकतवाला दल साबित हो चुका है ऐसे में स्वाभाविक तौर पर अगले साल होनेवाले विधानसभा आम चुनावों में राजद उनको अपने बराबर सीट नहीं देनेवाला है। कल डॉ. रघुवंश प्रसाद सिंह ने सीटों के बँटवारे के लिए लोकसभा चुनाव,2014 में प्राप्त मत-प्रतिशत को आधार बनाने की मांग करके इस बात का संकेत भी दे दिया है।

मित्रों,ऐसे में नीतीश कुमार चाहते ही नहीं हैं कि महागठबंधन के तहत चुनाव लड़ा जाए और इसलिए वे जनसमर्थन जुटाने के लिए संपर्क-यात्रा पर निकले हुए हैं। एक और मोर्चे पर नीतीश जी हालत न घर के घाट वाली हो रही है। नीतीश जी ने जीतनराम मांझी को कठपुतली समझकर अपने स्थान पर मुख्यमंत्री तो बना दिया लेकिन मांझी अब सिर का दर्द बन गए हैं। वे लगातार अपने बेतुके बयानों से विवाद खड़ा कर रहे हैं और बाँकी जातियों को दरकिनार कर केवल दलितों-महादलितों के नेता बनने का प्रयास कर रहे हैं जिससे पार्टी के प्रति अन्य जातियों में गुस्सा पैदा हो रहा है। इस प्रकार नीतीश कुमार न तो मांझी को मुख्यमंत्री बनाए रख सकते हैं और न ही हटा ही पा रहे हैं।

(हाजीपुर टाईम्स पर भी प्रकाशित)