पागल मत बनो केजरीवाल लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
पागल मत बनो केजरीवाल लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
रविवार, 31 मार्च 2013
पागल मत बनो केजरीवाल
मित्रों,वैसे तो मेरी सोंच और मेरा स्वभाव शुरू से ही युवा साम्यवादियों जैसा रहा है। मैंने हमेशा यथास्थिति को शिव के पिनाक धनुष की तरह पुनर्वार भंग करने का,तोड़ने का प्रयास किया है लेकिन मुझे इस बात को लेकर कभी गफलत नहीं रही है कि वर्तमान काल में ऐसा करना काफी कठिन है और दिन-ब-दिन कठिन से कठिनतर होता जानेवाला है। मैंने अपने एक आलेख में कई साल पहले ही लिखा था कि आज अगर गांधी भी साक्षात् आ जाएँ तो वे भी देश को कुछ खास नहीं बदल पाएंगे और उनको भी निराशा ही हाथ लगेगी। जब पूरा देश दूसरे रीतिकाल का निर्बाध और निफिक्र आनंद ले रहा हो,जब पूरा देश ऐन्द्रिक सुख के पीछे पागल हो,जब समाज का ज्यादा बड़ा तबका शराब की खुमारी में डूबा हो और सन्नी लियोन के देह-दर्शन को व्याकुल हो तब देश को कोई कैसे जगा सकता है?
सदस्यता लें
संदेश (Atom)
