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शुक्रवार, 1 मार्च 2013
नकारा एजेंसियों के भरोसे भारत की सुरक्षा
मित्रों,भारत की दूसरी साईबर राजधानी हैदराबाद में पिछले दस सालों में पाँचवीं बार बम फटे आज 8 दिन बीत चुके हैं। इस बीच हमारे प्रधानमंत्री म(हा)नमोहन सिंह जहाँ कड़े कदम उठाने की औपचारिक घोषणा कर चुके हैं वहीं भारत के अब तक के सबसे (ना?) लायक गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे दोषियों को कड़ी सजा देने का (झूठा?) वादा भी कर चुके हैं। परन्तु अब तक भारत सरकार और आंध्र प्रदेश सरकार की सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों की जाँच एक ईंच भी आगे नहीं बढ़ पाई है। वे लोग अभी भी दावे के साथ यह कह सकने की स्थिति में नहीं हैं कि इस आतंकवादी घटना में कौन-कौन से संगठन और लोग शामिल थे। प्रश्न उठता है कि घटना के बाद आतंकवादी कहाँ गायब हो गए? उनको जमीन खा गई या आसमान निगल गया? इस तरह की कोई भी घटना का बिना स्थानीय लोगों की सहायता के घट जाना संभव ही नहीं है। तो क्या केंद्र और आंध्र प्रदेश की सरकारों को सचमुच यह पता नहीं है कि इसमें कौन-कौन से देशी-विदेशी लोग शामिल थे अथवा वो इतनी बड़ी संख्या में
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