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मंगलवार, 11 अगस्त 2015

सावधान,मोदी जी,ई बिहार है,जुबान संभाल के!

हाजीपुर,ब्रजकिशोर सिंह। मित्रों,जब लोकसभा का चुनाव-प्रचार चल रहा था तब नरेंद्र मोदी अक्सर कहा करते थे कि मेरे हिसाब से पानी से आधा भरा गिलास पूरा भरा हुआ है यानि कि नरेंद्र मोदी जी सुपर आशावादी हैं लेकिन बिहार की दो रैलियों में नरेंद्र मोदी जी ने जो भाषण दिया है वह कदापि उनके इस पूर्व के बयान का समर्थन नहीं करता। उनके दोनों ही भाषणों में घबराहट है,पराजय का भय है मगर आत्मविश्वास नहीं है। मैं यह नहीं कहता कि मोदी का गिलास पूरी तरह से खाली है लेकिन आधा खाली तो जरूर है।
मित्रों,इन दोनों ही भाषणों में वही गलती की है जो कभी उन्होंने दिल्ली में केजरीवाल को अराजकतावादी और धरना विशेषज्ञ बताकर किया था। सकारात्मक सोंचवाले लोग दूसरों की आलोचना करने में समय बर्बाद नहीं करते बल्कि जनता को यह बताते हैं कि वे राज्य को क्या देने जा रहे हैं या उनकी झोली में राज्य के लिए कौन-कौन सी योजनाएँ हैं। मगर बिहार में मोदी जी ने अपने दोनों ही भाषणों में गाली-गलौज ही ज्यादा की है। शायद मोदी जी को पता नहीं है कि बिहार में गाली-गलौज को कितना बुरा माना जाता है और अक्सर गाली-गलौज के चलते हत्या तक हो जाया करती है। इसलिए उनको जो भी बोलना चाहिए जुबान संभाल के बोलना चाहिए अन्यथा भगवान न करे उनको एक बार फिर से दिल्ली का अनुभव करना पड़ सकता है। अगर ऐसा होता है तो वो भारत के पीएम के लिए तो झटका होगा ही बिहार की जनता के लिए भी दुःस्वप्न के समान होगा और बर्बाद बिहार और भी बर्बाद हो जाएगा।
मित्रों,इसलिए हम नरेंद्र मोदी जी से अनुरोध करते हैं कि जब वे अगली बार बिहार आएँ तो पूरी तरह भरे गिलासवाला भाषण दें। जनता को गठबंधन और गठबंधन करनेवालों की हकीकत पता है और उनसे ज्यादा पता है इसलिए आपादमस्तक कीचड़ में डूबे लोगों पर ढेला फेंकने की कोई जरुरत नहीं है बल्कि उनको सिर्फ यह बताना चाहिए कि वे बिहार के लिए क्या करने जा रहे हैं और इसके लिए उनके पास किस तरह की योजनाएँ हैं। मोदी जी पहले अपने मन में विश्वास उत्पन्न करें कि विकास के मुद्दे पर भी चुनाव जीते जा सकते हैं जनता खुद ही उनपर विश्वास कर लेगी। भयभीत व्यक्ति कभी जंग नहीं जीतते क्योंकि घबराहट बुद्धि और प्रतिउत्पन्नमतित्व को नष्ट कर देती है। कभी-कभी अतिआत्मविश्वास भी नुकसानदेह होता है क्योंकि वो आदमी को लापरवाह बना देता है।
हाजीपुर टाईम्स पर भी प्रकाशित

रविवार, 8 मार्च 2015

सावधान,नरेंद्र मोदी जी,कश्मीर कहीं आपको बर्बाद न कर दे?

मित्रों,इतिहास गवाह है कि भारत के महानतक शासकों में से एक अकबर ने दीने ईलाही धर्म चलाया था। ब्रिटिश इतिहासकार लेनपुल ने इसे अकबर की मूर्खता का स्मारक बताया है। वजह यह थी कि इस धर्म के चलते अकबर ने एक साथ हिन्दुओं और मुसलमानों दोनों का समर्थन खो दिया। मुसलमानों ने उसे मुसलमान मानना बंद कर दिया और हिंदुओं में यह भय व्याप्त हो गया कि अकबर इसके बहाने उनका धर्म छीनना चाहता है।
मित्रों, कुछ इसी तरह की मूर्खता इन दिनों भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी राजनैतिक पार्टी भाजपा कर रही है। भाजपा और मोदी ने कश्मीर में अलगाववादियों की समर्थक और भारत और भारतीय सेना की सबसे बड़ी दुश्मन पीडीपी के साथ सरकार बनाई है। इस सरकार ने अस्तित्व में आते ही सबसे पहला कदम यह उठाया है कि उसने भारतीय सेना पर पत्थरबाजी करने में सबसे आगे रहनेवाले मशरफ आलम को जेल से रिहा कर दिया है। इससे पहले शपथ-ग्रहण के समय ही मुफ्ती मोहम्मद सईद ने कश्मीर में शांति का मुख्य श्रेय़ पाकिस्तान और अलगाववादियों को दिया था।
मित्रों,भाजपा अभी भी कह रही है कि कश्मीर में सरकार न्यूनतम साझा कार्यक्रम के तहत चलाई जाएगी तो क्या यही है कश्मीर में भाजपा-पीडीपी की संयुक्त सरकार का न्यूनतम साझा कार्यक्रम?? अगर ऐसा है तो फिर भाजपा को कोई अधिकार नहीं है श्यामा प्रसाद मुखर्जी को अपना कहने का या फिर उनका नाम भी लेने का? अगर यही भाजपा का राष्ट्रवाद है तो फिर निश्चित रूप से यह भारत की उस बहुसंख्यक जनता के साथ धोखा है जिसने पिछले साल के लोकसभा चुनावों में उसे मत दिया था।
मित्रों,नरेंद्र मोदी और भाजपा को हरगिज यह नहीं भूलना चाहिए कि अगर हिन्दुओं का उसके प्रति मोहभंग हो गया तो उनकी हैसियत दो कौड़ी की भी नहीं रह जाएगी। रही बात मुसलमानों की तो मैं यह स्टांप पेपर पर लिखकर देने को तैयार हूँ कि उनका मत भाजपा को कभी नहीं मिलेगा। नरेंद्र मोदीजी और अमित शाह जी यह अकबर का जमाना नहीं है कि बिना जनता के विश्वास के भी कोई 50 सालों तक भारत पर शासन करेगा। आज के हिंदुस्तान में 5 साल के शासन को 10 में बदलना ही किसी भी व्यक्ति या दल के लिए टेढ़ी खीर होती है। ऐसा न हो कि साल 2019 आते-आते आपके ऊपर से भी माँ भारती की अनन्य भक्त भारत की बहुसंख्यक राष्ट्रवादी जनता का विश्वास समाप्त हो जाए।
मित्रों, चूँकि ऐसा होना भारत के विकास के लिए काफी अहितकारी सिद्ध होगा इसलिए मेरा नरेंद्र मोदी और अमित शाह से यह करबद्ध प्रार्थना है कि आपलोग कश्मीर के सनकी नेता मुफ्ती की सही रास्ते पर आने का स्पष्ट निर्देश दें और अगर फिर भी वो रास्ते पर नहीं आता है तो उसे बर्खास्त कर राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाएँ क्योंकि मैं नहीं चाहता कि नरेंद्र मोदी से भारत की जनता इतनी जल्दी नाराज हो जाए और फिर से देश देशद्रोहियों के हाथों में चला जाए। अंत में मैं मोदी जी और शाह जी को मैं भारतीय इतिहास के एक और दृष्टांत की याद दिलाना चाहूंगा। 5 जनवरी,1544 को शेरशाह सूरी और मारवाड़ के शासक मालदेव के बीच जेतारण का युद्ध लड़ा गया था जिसमें तत्कालीन भारत का बादशाह शेरशाह सूरी हारते-हारते बचा था और तब उसने कहा था कि एक मुट्ठी भर बाजरे की कीमत पर मैँ हिन्दुस्तान की सियासत खो बैठता। कहीं आपलोगों का भी वही हाल नहीं हो।
मित्रों,इससे पहले 7 अक्तूबर,2013,दिन सोमवार को मैंने ब्रज की दुनिया पर ब्लॉग लिखकर उस समय नरेंद्र मोदी जी को चेतावनी दी थी कि सावधान मोदीजी यू टर्न लेना मना है जब वे प्रधानमंत्री नहीं थे बल्कि प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार भर थे। लेकिन नरेंद्र मोदी क्यों सुनने लगे हमारी? आखिर मैं एक आर्थिक रूप से निहायत निर्बल,असफल छोटा-सा,सीधा-सादा,देशभक्त पत्रकार जो ठहरा।

(हाजीपुर टाईम्स पर भी प्रकाशित)