शुक्रवार, 11 सितंबर 2020

ईसाई मिशनरी हिंदुत्व के लिए खतरा


मित्रों, भारत में जब इसाईयत काआगमन हुआ तब भी उनके इरादे खतरनाक थे. इतिहास साक्षी है कि कालीकट के हिन्दू राजा जमोरिन ने बड़ी ही गर्मजोशी से १४९८ में वास्कोडिगामा का स्वागत किया था लेकिन वास्कोडिगामा जब दोबारा आया तो तोप लेकर आया और सीधे जमोरिन पर हमला बोल दिया. हजारों हिन्दुओं को मार दिया गया, हजारों को जबरन ईसाई बना दिया गया और इस कुत्सित कृत्य में उसका साथ दिया तथाकथित संत जेवियर ने जिसके नाम पर भारत में हजारों स्कूल हैं.  

मित्रों, कहने का तात्पर्य यह है कि मुसलमानों की ही तरह हिंदुत्व के प्रति ईसाईयों के मन में भी प्रारंभ से ही वैर था. बाद में जब अंग्रेजों ने पूरे भारत पर कब्ज़ा कर लिया तब भी लार्ड क्लाईव से लेकर लार्ड माउंटबेटन तक जितने भी गवर्नर, गवर्नर जनरल या वायसराय हुए सबके मन में भारत को ईसाई देश बना देने का सपना पल रहा था. भारत को अफ्रीका समझने वाले लार्ड कैनिंग ने तो ब्रिटिश सरकार को भेजे पत्रों में दावा किया था कि पचास साल बाद भारत में कोई हिन्दू नहीं बचेगा. लेकिन हमारे सनातन धर्म की जड़ें इतनी गहरी थीं कि ईसाई मिशनरी शासन में होते हुए भी हिंदुत्व का बाल भी बांका नहीं कर पाए.

मित्रों, फिर हमारा देश आजाद हुआ लेकिन दुर्भाग्यवश देश पर खुद को दुर्घटनावश हिन्दू कहनेवाले हिंदुविरोधी नेहरु और उसके परिवार का शासन कायम हो गया. फिर नेहरु के नाती राजीव गाँधी ने जो सिर्फ नाम का हिन्दू था एक रोमन कैथोलिक महिला से शादी कर ली. कहीं-न-कहीं इस महिला के दिमाग में भी वही सपना पल रहा था जो कभी लार्ड कैनिंग या जेवियर ने देखा था. फिर बिल्ली के भाग्य से छींका टूटा और सोनिया को २००४ में भारत की बागडोर सँभालने का मौका मिला. सोनिया को सिर्फ ईसाई नेता पसंद थे. उनमें से कुछ ऐसे भी थे जिन्होंने हिन्दुओं को धोखा देने के लिए नाम हिन्दुओं वाला ही रखा था लेकिन थे ईसाई. उन दस सालों में ईसाई मिशनरियों की मौज रही. पूरे जोर-शोर से धर्म-प्रचार, प्रलोभन और धर्मान्तरण का गन्दा खेल खेला गया. इस गर्हित कुकर्म में वामपंथियों और नक्सलियों ने भी उनका भरपूर साथ दिया. कई स्थानों पर तो ईसाई मिशनरियों और वामपंथियों ने मिलकर उद्योंग-धंधे भी बंद करवा दिए जिससे भारत को बारी आर्थिक क्षति भी हुई.

मित्रों, वो कहते हैं कि हर दिन की एक शाम भी होती है. तो वर्ष २०१४ में सोनिया शासन समाप्त हो गया और हिंदुत्व का शासन शुरू हुआ. फिर शुरू हुई एनजीओ की धड-पकड़. लेकिन अब ईसाई मिशनरियों ने भोले-भाले वनवासी हिन्दुओं को बरगलाने के लिए नए हथकंडे अपना लिए. अब ईसा मसीह भी कृष्णा और राम की वेश-भूषा में आ गए. 

मित्रों, यह बड़े ही हर्ष का विषय है कि भारत सरकार ने भारत में धर्मान्तरण करवाने वाले १३ बड़े ईसाई मिशनरी संगठनों की विदेशी फंडिंग रोक दी है. तथापि हवाला से पैसा आने का खतरा अब भी बना रहेगा. ऐसे में यह जरुरी है कि कानून बनाकर हिन्दू धर्म से धर्मान्तरण को अपराध घोषित किया जाए और हमारे जो भाई-बन्धु ईसाई बन गए हैं उनको वापस हिन्दू धर्म में लाया जाए. हमारे लिए एक-एक हिन्दू महत्वपूर्ण है. याद रखिए स्वामी विवेकानंद ने कहा था-एक हिंदू का धर्मान्तरण केवल एक हिंदू का कम होना नहीं, बल्कि एक शत्रु का बढ़ना है। साथ ही हिन्दू-संगठनों को सर्वहारा वर्ग को वो सब उपलब्ध करवाना होगा जो उनको ईसाई मिशनरी उपलब्ध करवाते हैं.

कोई टिप्पणी नहीं: